Divya Deshmukh बनी नई चेस क्वीन, FIDE Women’s World Cup 2025 जीता

भारत की शतरंज दुनिया में एक नया सितारा चमक उठा है। नागपुर की 19 वर्षीय दिव्या देशमुख (Divya Deshmukh) ने 2025 FIDE Women’s World Cup जीतकर इतिहास रच दिया है। अपने शानदार खेल और अदम्य साहस के दम पर वर्ल्ड कप जीतकर भारत का नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज कर दिया। यह जीत सिर्फ एक ट्रॉफी भर नहीं है, बल्कि यह भारत की उस गहराई और ताकत का प्रमाण है, जो शतरंज के हर मोर्चे पर दुनिया को चौंका रही है। भारत की महिला शतरंज के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है।

Divya Deshmukh Becomes The New Chess Queen, Wins Fide Women'S World Cup 2025
Divya Deshmukh becomes the new chess queen, wins FIDE Women’s World Cup 2025

❖ दिव्या देशमुख — संघर्ष से सफलता तक

नागपुर की रहने वाली दिव्या ने छोटी उम्र से ही शतरंज में अपनी प्रतिभा दिखानी शुरू कर दी थी। कठिन मेहनत, अनगिनत घंटे की प्रैक्टिस और हर मुकाबले में जीत की भूख ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया।

❖ वर्ल्ड कप में ऐतिहासिक प्रदर्शन

इस बार के वर्ल्ड कप में दिव्या ने दुनिया के दिग्गज खिलाड़ियों को मात देते हुए एक के बाद एक शानदार जीत दर्ज की। उनकी तेज़ चालें, सटीक रणनीति और मानसिक मजबूती ने प्रतिद्वंदियों को कोई मौका नहीं दिया।

❖ भारत की शतरंज शक्ति का नया दौर

विश्वनाथन आनंद, कोनेरू हंपी, और प्रग्गनानंधा के बाद अब दिव्या देशमुख का नाम भी उस सूची में शामिल हो गया है, जो भारत की शतरंज शक्ति को नई ऊँचाइयों पर ले जा रहे हैं। यह जीत आने वाली पीढ़ी को प्रेरित करने वाली है।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने घोषणा की है कि दिव्या को राज्य सरकार द्वारा सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने वीडियो कॉल पर दिव्या को बधाई देते हुए कहा—

“नागपुर और महाराष्ट्र की बेटी ने वर्ल्ड कप जीतकर हमारे राज्य और पूरे देश को गौरवान्वित किया है। यह जीत उनके साहस, मेहनत और लगन का परिणाम है।”

मुख्यमंत्री ने X (Twitter) पर भी लिखा—

“सिर्फ 19 साल की उम्र में दिव्या ने इतिहास रच दिया। वह भारत की 88वीं ग्रैंडमास्टर और FIDE Women’s World Cup जीतने वाली पहली भारतीय महिला बन गई हैं। नागपुर की गलियों से लेकर वैश्विक शतरंज मंच तक की उनकी यात्रा प्रतिभा, दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत की मिसाल है।”

प्रधानमंत्री से लेकर विपक्ष तक दी बधाई

दिव्या की इस जीत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विपक्ष के नेता राहुल गांधी, और देशभर के नेताओं ने शुभकामनाएँ दीं।

हंपी कोनेरू (Humpy Koneru) को हराकर रचा इतिहास

इस टूर्नामेंट के फाइनल में दिव्या देशमुख का सामना भारत की अनुभवी खिलाड़ी हंपी कोनेरू से हुआ। यह मुकाबला काफी रोमांचक रहा और टाईब्रेक तक चला। दिव्या ने शानदार खेल दिखाते हुए अंत में जीत हासिल की और खिताब अपने नाम कर लिया।

दिव्या की यात्रा उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा है जो बड़े सपने देखते हैं। उन्होंने यह साबित किया है कि उम्र, संसाधन या हालात कभी भी आपकी सफलता में रुकावट नहीं बन सकते, अगर आपके पास जुनून और मेहनत का साथ हो।

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