Last updated on June 30th, 2025 at 10:05 am
Shubhanshu Shukla Axiom Mission 4: भारतीय वायुसेना (IAF) के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने एक बड़ा इतिहास रचा है। वे राकेश शर्मा के बाद अंतरिक्ष में जाने वाले दूसरे भारतीय बन गए हैं। लेकिन खास बात यह है कि शुभांशु पहले भारतीय हैं जो इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पहुंचे हैं।
Axiom Mission 4 से शुरू हुआ ऐतिहासिक सफर
यह मिशन 25 जून 2025 को अमेरिका के फ्लोरिडा में मौजूद NASAके कैनेडी स्पेस सेंटर से शुरू हुआ। इसे SpaceX के Falcon 9 रॉकेट से लॉन्च किया गया और यह Axiom Mission 4 (Ax-4) का हिस्सा है।
इस मिशन में 4 अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं:
- पेगी व्हिटसन (कमांडर, अमेरिका)
- शुभांशु शुक्ला (पायलट, भारत)
- स्लावोश उज़नांस्की (पोलैंड)
- तिबोर कापू (हंगरी)
एक खिलौना सफ़ेद हंस भी मिशन का हिस्सा है, जो यह दिखाता है कि अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण नहीं है।
कौन हैं शुभांशु शुक्ला?
शुभांशु का जन्म लखनऊ, उत्तर प्रदेश में हुआ। वे 2006 में भारतीय वायुसेना में शामिल हुए और एक अनुभवी फाइटर व टेस्ट पायलट हैं। उनके पास 2,000 घंटे से अधिक का उड़ान अनुभव है।
- मार्च 2024 में उन्हें ग्रुप कैप्टन पद मिला।
- शुभांशु ISRO के गगनयान मिशन (Mission Gaganyaan) के लिए चुने गये 4 अंतरिक्ष यात्रियों में शामिल हैं।
- उन्होंने रूस के यूरी गागरिन ट्रेनिंग सेंटर से 1 साल की ट्रेनिंग पूरी की।
उनके परिवार ने उन्हें “हीरो” कहा और गर्व व्यक्त किया।
शुभांशु का मिशन क्या है?
शुभांशु और उनकी टीम 28 घंटे की यात्रा के बाद ISS (International Space Station) पहुंचे। वहां वे 14 दिन बिताएंगे और 60 से ज्यादा वैज्ञानिक प्रयोग करेंगे। ये प्रयोग भारत समेत 31 देशों के हैं।
भारत के लिए शुभांशु 7 खास प्रयोग करेंगे, जैसे:
- अंतरिक्ष में ऑक्सीजन बनाने वाले सायनोबैक्टीरिया के उत्पादन का टेस्ट
- अंतरिक्ष में बीज उगाना
- खाने योग्य शैवाल पर रेडिएशन का प्रभाव
- मानव-संवाद तकनीक पर असर
- माइक्रोग्रैविटी (बिना गुरुत्व) में इंसानों की स्क्रीन देखने की क्षमता
- खाने लायक शैवाल (microalgae) पर असर देखना
- फसलों की उपज पर माइक्रोग्रैविटी का प्रभाव
शुभांशु ने कहा –
“हम यह जांच रहे हैं कि क्या ये बैक्टीरिया अंतरिक्ष में ऑक्सीजन बना सकते हैं, ताकि भविष्य में अंतरिक्ष यात्री वहां आराम से रह सकें।”
मिशन में देरी क्यों हुई ?
यह मिशन तकनीकी खामियों और खराब मौसम के कारण पहले पाँच बार स्थगित किया गया था। कई बाधाओं के बाद, आखिरकार 25 जून को इसे सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया।
अंतरिक्ष से शुभांशु का पहला भावुक संदेश
अंतरिक्ष में पहुंचते ही शुभांशु शुक्ला ने भारत को लाइव वीडियो कॉल के जरिए संबोधित किया और कहा:
“नमस्कार! मैं अभी ज़ीरो ग्रैविटी में खुद को ढाल रहा हूं। ऐसा लग रहा है जैसे कोई बच्चा पहली बार चलना सीख रहा हो। मैं इस पल का पूरा आनंद ले रहा हूं। तिरंगा हमेशा याद दिलाता है कि आप सब मेरे साथ हैं। यह मिशन मेरी नहीं, हम सबकी यात्रा है।”
पूरा देश गर्व से झूम उठा
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुभांशु को शुभकामनाएं दी।
पीएम मोदी ने कहा –
“शुभांशु शुक्ला 140 करोड़ भारतीयों की उम्मीदें लेकर अंतरिक्ष गए हैं। उन्हें और उनकी टीम को बहुत-बहुत बधाई।”
भारत के लिए यह मिशन क्यों मायने रखता है?
यह मिशन भारत के लिए एक बहुत बड़ी वैज्ञानिक और रणनीतिक सफलता है। ISRO और NASA इसे गगनयान मिशन और भविष्य के भारतीय स्पेस स्टेशन के लिए अहम कदम मानते हैं। यह भारत को मानव अंतरिक्ष मिशनों में वैश्विक स्तर पर मज़बूत भूमिका दिलाएगा।
भारत का भविष्य अंतरिक्ष में
ISRO और भारत सरकार का मानना है कि शुभांशु का अनुभव भविष्य के गगनयान मिशन और भारतीय स्पेस स्टेशन के लिए बहुत काम आएगा।
ISRO के पूर्व चेयरमैन ने कहा –
“शुभांशु का यह मिशन भारत को मानव अंतरिक्ष यात्रा में मजबूत बनाएगा।”
शुभांशु शुक्ला की यह उड़ान सिर्फ एक अंतरिक्ष यात्रा नहीं, बल्कि भारत की नई उड़ान है। 41 साल बाद फिर से एक भारतीय अंतरिक्ष में गया और दुनिया को दिखा दिया कि भारत अब अंतरिक्ष की दौड़ में पीछे नहीं है।